🐃 भैंस के 10 प्रमुख रोग + नस्ल गाइड — सम्पूर्ण लक्षण, कारण व उपचार
| नस्ल | उत्पत्ति स्थान | विशेषता |
|---|---|---|
| मुर्राह (Murrah) | हरियाणा — रोहतक, हिसार, झज्जर, भिवानी जिला | विश्व की सर्वश्रेष्ठ दूध भैंस नस्ल · 1800–2500 L/लैक्टेशन · वसा% 7–8% · काला रंग · कसकर मुड़े सींग · इटली और बुल्गारिया में भी पाली जाती है · भारत से निर्यात |
| नीली-रावी (Nili-Ravi) | पंजाब (मूलतः पाकिस्तान — रावी नदी क्षेत्र) · भारत में पंजाब, हरियाणा | दूध 1500–2000 L/लैक्टेशन · नीली-काली खाल · माथे पर सफेद धब्बा · वसा% 6–7% · पंजाब में मुर्राह के बाद दूसरी पसंद |
| मेहसाना (Mehsana) | गुजरात — मेहसाना जिला · मुर्राह × सुरती क्रॉस से विकसित | दूध 1200–1800 L/लैक्टेशन · काला-भूरा रंग · गुजरात में सबसे लोकप्रिय · वसा% 6.5–7% · मुर्राह से बड़ी और सुरती से अधिक दूध |
| सुरती (Surti) | गुजरात — सूरत, खेड़ा, वड़ोदरा जिला | दूध 900–1200 L/लैक्टेशन · भूरा-सफेद रंग · वसा% 7–8% · छोटे किसानों के लिए उपयुक्त · गर्मी-सहिष्णु |
| जाफराबादी (Jaffarabadi) | गुजरात — जूनागढ़, गिर-सोमनाथ, अमरेली जिला | भारत की सबसे बड़ी भैंस नस्ल · 600–900 kg · दूध 1000–1400 L · विशाल सींग · प्रभावशाली दिखावट · मांस और दूध दोनों |
| नस्ल | उत्पत्ति स्थान | विशेषता |
|---|---|---|
| भदावरी (Bhadawari) | उत्तर प्रदेश — आगरा, इटावा, भिंड · मध्य प्रदेश सीमावर्ती | सर्वाधिक वसा% (12–14%) दूध · कम दूध पर अत्यधिक घी · भूरा-तांबे का रंग · सूखा-सहिष्णु · छोटे किसानों के लिए आदर्श |
| नागपुरी (Nagpuri) | महाराष्ट्र — नागपुर, विदर्भ क्षेत्र · मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश | दूध 700–1000 L · सफेद रंग · लम्बे सीधे सींग · मांस और भार-कार्य में भी उपयुक्त · विदर्भ क्षेत्र की पहचान |
| पंढरपुरी (Pandharpuri) | महाराष्ट्र — सोलापुर, सांगली, कोल्हापुर | दूध 700–900 L · सफेद रंग · लम्बे चपटे सींग · दक्षिण महाराष्ट्र में लोकप्रिय · दूध का वसा% 7% |
| तोडा (Toda) | तमिलनाडु — नीलगिरि पहाड़ियाँ (ऊटी क्षेत्र) | तोडा जनजाति की पवित्र भैंस · दूध 500–700 L · वसा% 8–9% · ऊँचाई पर रहने वाली · GI Tag प्राप्त · NBAGR संरक्षित |
| चिल्का (Chilika) | ओडिशा — खुर्दा, पुरी (चिल्का झील क्षेत्र) | छोटी नस्ल · 300–400 kg · दलदली-तटीय क्षेत्र के लिए · कम रखरखाव · ओडिशा के मछुआरों में लोकप्रिय |
खुरपका-मुंहपका रोग (FMD) भैंस में भी गाय जितना ही घातक है। भैंस में Serotype O सबसे अधिक पाया जाता है। ICAR-IVRI की रिपोर्ट के अनुसार भारत में FMD से भैंसों को सालाना ₹20,000 करोड़ से अधिक का नुकसान होता है — दूध उत्पादन में भारी कमी और खुर की क्षति मुख्य कारण हैं।
| विषय | विवरण |
|---|---|
| रोगकारक | Aphthovirus (Picornaviridae) |
| Serotypes (भैंस में) | मुख्यतः Serotype O · साथ में A, Asia-1 भी |
| प्रसार | सम्पर्क, हवा, दूषित चारा-पानी, पशु मेले |
| प्रभावित पशु | भैंस, गाय, भेड़, बकरी, सूअर |
| मृत्यु दर (वयस्क) | 1–5% (पाड़ों में 50% तक) |
| भैंस में विशेषता | दूध उत्पादन 60–80% तक गिर सकता है · पूरी लैक्टेशन प्रभावित |
| ICAR-IVRI सन्दर्भ | IVRI, Izatnagar · FMD Control Programme (GoI) |
| लक्षण | विवरण |
|---|---|
| तेज़ बुखार | 104–106°F (40–41°C), अचानक आता है |
| मुंह में छाले | जीभ, मसूड़े, तालू पर छोटे दाने → बड़े छाले → घाव |
| लार टपकना | मुंह से लगातार लार/झाग बहना, जुगाली बंद |
| खुरों में छाले | खुरों के बीच सूजन, दर्द, भैंस लंगड़ाने लगती है |
| दूध में भारी कमी | दूध उत्पादन 60–80% तक घट जाता है · पूरी लैक्टेशन प्रभावित |
| थनों पर घाव | दूधारू भैंसों के थनों पर भी छाले बन सकते हैं |
| पाड़ों में मृत्यु | युवा पाड़ों में हृदय पर प्रभाव → मृत्यु संभव |
| उपचार | विधि / दवा |
|---|---|
| मुंह के घाव | फिटकरी + पानी या Potassium Permanganate (1:1000) से धोना · Boroglycerin paste लगाना |
| खुर के घाव | CuSO₄ (5%) या Phenol (1%) से धोना · Copper Sulphate footbath |
| बुखार | Meloxicam / Flunixin Meglumine (पशु चिकित्सक द्वारा) |
| द्वितीयक संक्रमण | Oxytetracycline / Ampicillin (पशु चिकित्सक द्वारा) |
| आहार | नरम चारा, दलिया, हरा घास · कठोर भूसा न दें |
| आइसोलेशन | बीमार पशु को 14 दिन अलग रखें · पानी-चारा अलग |
| परिसर | Sodium Carbonate (4%) या Sodium Hydroxide से छिड़काव |
| विषय | विवरण |
|---|---|
| टीके का प्रकार | Inactivated Trivalent Oil-adjuvanted Vaccine (O+A+Asia-1) |
| पहला टीका | 4 माह की आयु में |
| बूस्टर | पहले टीके के 1 माह बाद |
| पुनः टीकाकरण | हर 6 माह पर (साल में 2 बार) |
| सरकारी योजना | GoI — FMD-CP (FMD Control Programme) — निःशुल्क |
| टीका कहाँ मिलेगा | ICAR-IVRI, Izatnagar · पशु चिकित्सालय · सरकारी कैम्प |
| सावधानी | गर्भवती भैंस को टीका — पशु चिकित्सक की सलाह से ही |
लंपी स्किन डिज़ीज़ (LSD) Capripoxvirus के कारण होने वाला वायरल रोग है जो भैंसों को भी प्रभावित करता है। 2022 में भारत में भैंसों में भी यह बड़े पैमाने पर फैला। यह मुख्यतः मच्छर, मक्खी, जूँ और टिक के माध्यम से फैलता है। भैंस की गहरी खाल के कारण गाँठें देर से दिखती हैं।
| विषय | विवरण |
|---|---|
| रोगकारक | Capripoxvirus (Poxviridae परिवार) |
| प्रसार | मच्छर, मक्खी, टिक, जूँ (कीट-वाहक), सीधा सम्पर्क |
| भैंस में विशेषता | गहरी काली खाल के कारण गाँठें देर से दिखती हैं · ध्यान से जाँचें |
| मृत्यु दर | 1–3% (भैंस में अपेक्षाकृत कम) |
| IVRI योगदान | Lumpi-ProVacInd (ICAR-IVRI + NRCE विकसित) |
| चरण | लक्षण |
|---|---|
| प्रारम्भिक (1-3 दिन) | तेज़ बुखार (104-106°F), आँखों से पानी, नाक बहना, भूख कम |
| मुख्य (4-14 दिन) | पूरे शरीर पर 2–5 cm व्यास की गोल-गोल सख्त गाँठें बनना |
| गाँठों का विकास | गाँठें पकती हैं → फटती हैं → गहरे घाव बनते हैं |
| लसीका ग्रंथियाँ | गले, कंधे की लसीका ग्रंथियाँ सूज जाती हैं |
| दूध उत्पादन | 40–60% तक कमी · थनों पर भी गाँठें बन सकती हैं |
| भैंस की खाल | काली खाल पर गाँठें कम दिखती हैं — हाथ से छूकर जाँचें |
| उपचार | विधि |
|---|---|
| घावों की सफाई | Povidone-Iodine (Betadine) से धोना · Zinc oxide ointment लगाना |
| बुखार | Meloxicam / Phenylbutazone (पशु चिकित्सक द्वारा) |
| द्वितीयक संक्रमण | Broad-spectrum Antibiotics — Oxytetracycline / Enrofloxacin |
| मच्छर-मक्खी नियंत्रण | Cypermethrin spray · Neem oil · मच्छरदानी |
| आइसोलेशन | कम से कम 28 दिन अलग रखें |
| पोषण | विटामिन A+E, खनिज मिश्रण, हरा चारा अधिक दें |
| विषय | विवरण |
|---|---|
| टीके का नाम | Lumpi-ProVacInd |
| विकसित किया | ICAR-IVRI, Bareilly + ICAR-NRCE, Bikaner |
| टीके का प्रकार | Live Attenuated Vaccine (Sheep Pox Vaccine से) |
| आयु | 4 माह से ऊपर सभी पशुओं को |
| पुनः टीकाकरण | वार्षिक (प्रकोप क्षेत्र में तुरंत) |
| उपलब्धता | पशु चिकित्सालय · सरकारी शिविर · IVRI केन्द्र |
भैंस में Bovine Herpesvirus-1 (BHV-1) संक्रमण श्वसन तंत्र, आँखें और प्रजनन तंत्र को प्रभावित करता है। भैंस में यह रोग विशेषतः गर्भपात और बाँझपन के रूप में अधिक देखा जाता है। एक बार संक्रमित होने के बाद वायरस latent रहता है।
| लक्षण | विवरण |
|---|---|
| तेज़ बुखार | 104–106°F · अचानक आना |
| नाक बहना | पहले पानी जैसा · फिर गाढ़ा पीला स्राव |
| आँखें लाल | Conjunctivitis · आँखों से स्राव · Cornea पर सफेद धब्बे |
| खाँसी | सूखी खाँसी · साँस लेने में कठिनाई · Tracheitis |
| गर्भपात | गर्भवती भैंस में गर्भपात · बाँझपन — भैंस में प्रमुख समस्या |
| पाड़ों में | Encephalitis (मस्तिष्क सूजन) · अधिक घातक |
| उपचार | विधि |
|---|---|
| वायरल उपचार | कोई एंटीवायरल नहीं · सहायक उपचार |
| आइसोलेशन | बीमार पशु को तुरंत अलग करें |
| Anti-inflammatory | Meloxicam/Flunixin (बुखार-सूजन के लिए) |
| Antibiotics | Secondary bacterial infection रोकने के लिए |
| टीकाकरण | MLV (Modified Live Virus) या KV (Killed Virus) Vaccine · 4-6 माह पर पहला |
| विषय | विवरण |
|---|---|
| टीके का प्रकार | MLV (Modified Live Vaccine) या KV (Killed Vaccine) |
| पहला टीका | 4–6 माह की आयु में |
| पुनः टीकाकरण | वार्षिक — प्रजनन सीज़न से पहले |
| इंजेक्शन स्थान | गर्दन की मांसपेशी (Intramuscular — IM) या नाक में (Intranasal) |
| मात्रा | 2 ml (IM) — पशु चिकित्सक के अनुसार |
| गर्भवती भैंस | MLV न दें — KV (Killed) ही दें · पशु चिकित्सक की सलाह लें |
गलघोंटू (HS) Pasteurella multocida Serotype B:2 जीवाणु के कारण होता है। भारत में भैंस इस रोग के प्रति गाय से अधिक संवेदनशील है। बिना उपचार के पशु की मृत्यु 24–72 घंटों में हो जाती है। वर्षा के बाद (जून-सितंबर) सबसे अधिक प्रकोप होता है।
| विषय | विवरण |
|---|---|
| रोगकारक | Pasteurella multocida (B:2) |
| मुख्य मौसम | जून–सितंबर (वर्षाकाल) |
| मृत्यु दर | 90–100% (बिना उपचार) |
| मृत्यु की गति | 24–72 घंटे में मृत्यु संभव |
| भैंस की विशेषता | भैंस गाय से अधिक संवेदनशील — भारत में भैंसों में मृत्यु दर अधिक |
| प्रसार | संक्रमित पशु का मल-मूत्र, दूषित जल, चारा |
| लक्षण | विवरण |
|---|---|
| तेज़ बुखार | 106–107°F (41–42°C) · अचानक |
| गले-गर्दन में सूजन | गर्दन + गले के आसपास गर्म, दर्दनाक सूजन |
| साँस की कठिनाई | घुरघुराने की आवाज़ · मुंह खोलकर साँस लेना |
| लार बहना | मुंह से झाग/लार बहना · जीभ बाहर |
| चाल विकार | लड़खड़ाना · भैंस की पीठ मुड़ जाती है |
| मृत्यु | 24–72 घंटे में अगर उपचार न हो |
| उपचार/टीका | विवरण |
|---|---|
| मुख्य एंटीबायोटिक | Oxytetracycline LA (20%) — IV / IM (पशु चिकित्सक द्वारा) |
| वैकल्पिक | Ampicillin + Sulbactam · Penicillin G |
| सहायक उपचार | IV Fluids (NS/RL) · Corticosteroids (गम्भीर में) |
| टीका (HS Vaccine) | Oil Adjuvant HS Vaccine · ICAR-IVRI, Izatnagar |
| पहला टीका | 6 माह की आयु में |
| पुनः टीकाकरण | वार्षिक — वर्षाकाल से पहले (मई-जून) |
| संयुक्त टीका | HS+BQ Combined Vaccine उपलब्ध |
ब्लैक क्वार्टर (BQ/एकटंगिया) Clostridium chauvoei जीवाणु के बीजाणुओं से होता है। 6–24 माह के स्वस्थ और मोटे पाड़े अधिक संवेदनशील होते हैं। भारत में वर्षाकाल में इसका प्रकोप अधिक होता है।
| लक्षण | विवरण |
|---|---|
| अचानक लंगड़ाना | कंधे, जाँघ, पीठ की मांसपेशियाँ अचानक सूज जाती हैं |
| सूजन में आवाज़ | सूजन को दबाने पर Crepitus (चरमराने की आवाज़) आती है |
| गर्म-दर्दनाक सूजन | पहले गर्म, दर्दनाक → बाद में ठंडी, सुन्न, काली |
| तेज़ बुखार | 106–107°F · अचानक |
| मांसपेशी काली पड़ना | प्रभावित क्षेत्र काला, गंधयुक्त (gas gangrene) |
| मृत्यु | 12–48 घंटे में बिना उपचार मृत्यु |
| उपचार/टीका | विवरण |
|---|---|
| एंटीबायोटिक | High dose Penicillin G (IV) — तुरंत पशु चिकित्सक द्वारा |
| BQ Antiserum | उपलब्ध हो तो तुरंत दें |
| टीका (BQ Vaccine) | Formalin-inactivated C. chauvoei · ICAR-IVRI विकसित |
| पहला टीका | 6 माह की आयु में · बूस्टर 1 माह बाद |
| पुनः टीकाकरण | वार्षिक (वर्षाकाल से पहले) |
| विषय | विवरण |
|---|---|
| टीके का प्रकार | Formalin-inactivated C. chauvoei Vaccine (BQ Vaccine) |
| संयुक्त टीका | HS+BQ Combined Vaccine — एक ही इंजेक्शन में दोनों बीमारियों से बचाव |
| पहला टीका | 6 माह की आयु में |
| बूस्टर | पहले टीके के 1 माह बाद |
| पुनः टीकाकरण | वार्षिक — वर्षाकाल से पहले (मई–जून) |
| इंजेक्शन स्थान | गर्दन की मांसपेशी (Intramuscular — IM) |
| मात्रा | 5 ml (IM) — पशु चिकित्सक के अनुसार |
| कहाँ मिलेगा | ICAR-IVRI, Izatnagar · पशु चिकित्सालय · सरकारी कैम्प |
एंथ्रेक्स Bacillus anthracis जीवाणु के बीजाणुओं के कारण होता है। यह Zoonotic रोग है — पशु से मनुष्यों में भी फैल सकता है। भैंस में अचानक मृत्यु इसका प्रमुख लक्षण है।
| विषय | विवरण |
|---|---|
| रोगकारक | Bacillus anthracis (बीजाणु मिट्टी में 60+ वर्ष तक जीवित) |
| मुख्य लक्षण | अचानक मृत्यु · नाक/मुंह से काला खून · सूजन |
| मृत्यु दर | 80–100% (बिना उपचार) |
| Peracute form | बिना लक्षण 1–2 घंटे में मृत्यु · मुंह-नाक से खून |
| मरे पशु का | शव न चीरें — spores फैलते हैं · 5 फुट गहरा दफनाएं+चूना डालें |
| उपचार | High dose Penicillin G + Anthrax Antiserum (शीघ्र) |
| टीका | Live Anthrax Spore Vaccine · ICAR-IVRI, Izatnagar · वार्षिक |
| विषय | विवरण |
|---|---|
| टीके का प्रकार | Live Anthrax Spore Vaccine (Sterne Strain 34F2) |
| पहला टीका | 6 माह की आयु में |
| पुनः टीकाकरण | वार्षिक — प्रकोप वाले क्षेत्रों में मार्च–अप्रैल |
| इंजेक्शन स्थान | गर्दन के नीचे की त्वचा के नीचे (Subcutaneous — SC) |
| मात्रा | 1 ml (SC) — ICAR-IVRI निर्देशानुसार |
| गर्भवती भैंस | Live vaccine — पशु चिकित्सक की सलाह अनिवार्य |
थनैला (Mastitis) भैंसों में भी सबसे आम और आर्थिक रूप से हानिकारक रोग है। भैंस में Subclinical Mastitis का प्रचलन अधिक है जिसे किसान अक्सर पहचान नहीं पाते। भारत में इससे भैंस पालकों को सालाना ₹6,000 करोड़ से अधिक का नुकसान होता है।
| प्रकार | मुख्य रोगकारक जीवाणु | विशेषता |
|---|---|---|
| Contagious Mastitis | S. aureus, Str. agalactiae | थन से थन में · दूध निकालते वक्त |
| Environmental Mastitis | E. coli, Klebsiella, Streptococcus | वातावरण से · गंदगी में अधिक |
| Subclinical Mastitis | S. aureus, CNS | बाहरी लक्षण नहीं · भैंस में अधिक — CMT से पकड़ें |
| प्रकार | लक्षण |
|---|---|
| Clinical (सामान्य) | थन लाल, सूजा, गर्म, दर्दनाक · दूध में गुच्छे/मवाद · दूध कम |
| Peracute (गम्भीर) | तेज़ बुखार · पूरे थन में सूजन · भैंस खड़ी न हो · Septicemia |
| Subclinical (छुपा हुआ) | बाहरी लक्षण नहीं · SCC > 2 लाख/ml · भैंस में बहुत आम · CMT से पकड़ें |
| उपाय | विधि |
|---|---|
| Intramammary Infusion | Cloxacillin / Penicillin+Novobiocin Infusion — थन में (पशु चिकित्सक) |
| Systemic Antibiotics | Ceftiofur / Ampicillin / Oxytetracycline — IM/IV |
| Dry Period Therapy | दूध सूखने पर Dry Cow Antibiotic Tube लगाएँ — भैंस में अनिवार्य |
| स्वच्छता | थन धोना · दूध दुहने से पहले-बाद में Iodine dip · बर्तन साफ |
| दुग्ध क्रम | पहले स्वस्थ भैंस, बाद में बीमार भैंस का दूध निकालें |
- गंदे हाथों से दूध निकालना
- दूध दुहने के बाद थन न धोना
- बीमार-स्वस्थ भैंस एक साथ
- Subclinical को नज़रअंदाज़ करना
- दुहने से पहले थन Iodine से पोंछें
- दुहने के बाद Post-dip ज़रूर करें
- Dry Period Therapy अपनाएँ
- CMT Test नियमित करें
| विषय | विवरण |
|---|---|
| टीके का प्रकार | Staphylococcal / Streptococcal Mastitis Vaccine (Killed) |
| कब लगाएँ | Dry Period (दूध सूखने के समय) में — ब्याने से 6–8 सप्ताह पहले |
| बूस्टर | पहले इंजेक्शन के 2 सप्ताह बाद दूसरा |
| इंजेक्शन स्थान | गर्दन या कंधे के पीछे की मांसपेशी (Intramuscular — IM) |
| मात्रा | 2–5 ml (IM) — लेबल के अनुसार |
| Dry Period Therapy | टीके के साथ Dry Cow Antibiotic Tube भी लगाएँ — भैंस में अनिवार्य |
थाइलेरिया Theileria annulata प्रोटोज़ोआ परजीवी के कारण होता है जो Hyalomma टिक से फैलता है। भैंस में देशी नस्ल भी इससे प्रभावित होती है, हालाँकि विदेशी नस्ल की संकर भैंसें अधिक संवेदनशील हैं।
| लक्षण | विवरण |
|---|---|
| तेज़ बुखार | 105–107°F · लगातार · पहला प्रमुख लक्षण |
| लसीका ग्रंथियाँ सूजना | कंधे + गले की ग्रंथियाँ सूज जाती हैं |
| पीली आँखें | Icterus (पीलिया) · आँख-मुंह की झिल्ली पीली-सफेद |
| Haemoglobinuria | लाल/भूरे रंग का पेशाब · RBC टूटने से |
| साँस कठिनाई | फेफड़ों में तरल · नाक से झाग |
| दूध कमी | दूध लगभग बंद हो जाता है |
| उपचार | विधि |
|---|---|
| मुख्य दवा | Buparvaquone (Butalex) — IM (पशु चिकित्सक द्वारा) |
| Supportive | IV Fluids · Haematinics · Vitamin B12 |
| किलनी नियंत्रण | Cypermethrin / Deltamethrin spray · नियमित Acaricide |
| भैंस में विशेष | भैंस की मोटी खाल में टिक देखना कठिन — नियमित जाँच करें |
| विषय | विवरण |
|---|---|
| मुख्य दवा | Buparvaquone (Butalex) — 2.5 mg/kg — Intramuscular (IM) |
| मात्रा (उदाहरण) | 300 kg भैंस → 30 ml Buparvaquone |
| Tick नियंत्रण | Deltamethrin / Cypermethrin spray — हर 15–21 दिन · पूरे शरीर पर |
| Acaricide Dip | Amitraz (0.05%) में पूरी भैंस डुबोएँ — प्रकोप में |
| टीका | ICAR-IVRI में शोध जारी · अभी व्यापक रूप से उपलब्ध नहीं |
दुग्ध ज्वर भैंस में ब्याने के बाद रक्त में कैल्शियम की अचानक कमी के कारण होता है। भैंस में यह गाय की तुलना में अधिक आम है क्योंकि भैंस का दूध अधिक वसायुक्त और कैल्शियम-युक्त होता है। अधिक दूध देने वाली भैंसें अधिक संवेदनशील होती हैं।
| चरण | लक्षण |
|---|---|
| Stage 1 (हल्का) | बेचैनी · खुरों से ज़मीन खुरचना · हल्का कंपकंपी |
| Stage 2 (सामान्य) | भैंस उठ नहीं पाती · गर्दन S-आकार में मुड़ जाती है · ठंडे कान |
| Stage 3 (गम्भीर) | पूरी तरह लेट · बेहोशी · मृत्यु का खतरा |
| उपचार / बचाव | विधि |
|---|---|
| मुख्य उपचार | Calcium Borogluconate (20–25%) — IV (धीरे-धीरे) — पशु चिकित्सक |
| Sub-cut भी दे सकते | Calcium Borogluconate SC — विभिन्न स्थानों पर |
| बचाव — आहार | ब्याने से 2 सप्ताह पहले से Calcium supplement · Vit D₃ |
| ब्याने के बाद | Calcium Drench (मुँह से) — 24 और 48 घंटे पर · भैंस में अनिवार्य |
| विषय | विवरण |
|---|---|
| मुख्य दवा | Calcium Borogluconate 20–25% Solution (450 ml bottle) |
| IV (नस में) | गर्दन की जुगुलर नस में — पशु चिकित्सक द्वारा — बहुत धीरे (30 मिनट में) |
| SC (त्वचा के नीचे) | गर्दन, कंधे, पसली के पास — 2–3 अलग-अलग जगह बाँट कर दें |
| मात्रा (भैंस) | 450–500 ml Calcium Borogluconate (IV) — भैंस का वज़न अधिक होता है |
| गति | बहुत धीरे दें — तेज़ देने से दिल की धड़कन बिगड़ सकती है |
| Vitamin D3 | ब्याने से 2–8 दिन पहले Vitamin D3 injection — बचाव के लिए |
| प्रकार | कारण | विशेषता |
|---|---|---|
| Frothy Bloat | Legume (लोबिया, बरसीम, ल्यूसर्न) अधिक खाने से | झाग वाली गैस · Foam stabilizers से |
| Free Gas Bloat | रूमेन से गैस निकलने का रास्ता बंद | शुद्ध गैस · Oesophagus blockage |
| लक्षण | विवरण |
|---|---|
| बायीं पसली उभरना | बायाँ पेट (Rumen) गुब्बारे जैसा फूल जाता है |
| साँस कठिनाई | भैंस मुंह खोलकर साँस लेती है · बेचैनी |
| पेट पर ठोकने पर | Drum जैसी आवाज़ (Tympanic resonance) |
| अचानक मृत्यु | गम्भीर तिम्पनी में श्वसन रुकने से मृत्यु |
| उपचार | विधि |
|---|---|
| हल्के मामले | नमक-सरसों तेल (250 ml) मुँह से · हल्की चाल · पेट की मालिश |
| Frothy Bloat | Poloxalene (Bloat Guard) 30–60 g · Dimethicone (Antifoaming agent) |
| Stomach Tube | Oesophageal tube से गैस निकालना (पशु चिकित्सक) |
| आपातकाल | Trocar & Cannula — बायीं पसली में needle डालकर गैस निकालना |
| बचाव | सूखे भूसे के बाद हरा चारा दें · गीले बरसीम न खिलाएँ |
| बचाव | तरीका |
|---|---|
| चारा क्रम | पहले सूखा भूसा दें — फिर हरा चारा · खाली पेट बरसीम कभी नहीं |
| गीला बरसीम | ओस वाला या गीला बरसीम न दें · धूप में सुखाएँ |
| Anti-bloat block | Poloxalene lick block — हरे चारे के साथ रखें |
| सरसों तेल | हरा चारा देते वक्त 50–100 ml सरसों तेल मिलाएँ |
| चरागाह बचाव | Legume वाले खेत में धूप में ही भेजें · सुबह ओस में नहीं |
| रोग | प्रकार | मुख्य लक्षण | मृत्यु दर | तुरंत उपाय |
|---|---|---|---|---|
| खुरपका-मुंहपका (FMD) | वायरल | मुंह-खुर पर छाले · लार · लंगड़ाना | 1–5% (पाड़ों में अधिक) | आइसोलेशन · पशु चिकित्सक · FMD Vaccine |
| लंपी स्किन (LSD) | वायरल | शरीर पर गाँठें · बुखार · दूध कमी | 1–3% | आइसोलेशन 28 दिन · मच्छर नियंत्रण |
| गलघोंटू (HS) | जीवाणु | गले सूजन · घुरघुराना · बुखार | 90–100% | तुरंत पशु चिकित्सक · Oxytetracycline IV |
| ब्लैक क्वार्टर (BQ) | जीवाणु | मांसपेशी काली · Crepitus · बुखार | 80–100% | तुरंत Penicillin G IV · पशु चिकित्सक |
| एंथ्रेक्स (Anthrax) | जीवाणु (Zoonotic) | अचानक मृत्यु · काला खून | 80–100% | शव न छुएँ · पशु विभाग को तुरंत सूचित |
| थनैला (Mastitis) | जीवाणु | थन सूजन · दूध में मवाद · Subclinical | कम | CMT test · Intramammary Infusion |
| थाइलेरिया | परजीवी | बुखार · पीलिया · लाल पेशाब | 30–50% | Buparvaquone IM · Tick control |
| दुग्ध ज्वर (Milk Fever) | चयापचय | ब्याने के बाद उठ न पाना · गर्दन मुड़ना | 5–10% | Calcium Borogluconate IV · तुरंत |
| अफारा (Bloat) | पाचन | बायाँ पेट फूलना · साँस कठिनाई | 10–30% | Antifoaming agent · Stomach tube · Trocar |
| BHV संक्रमण | वायरल | नाक बहना · खाँसी · गर्भपात | 5–10% | आइसोलेशन · Antibiotics (secondary) |